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सिनेमा और समाज : ‘एक थी डायन’ को प्रमोट कर रही ‘एक डायन’ !


1zw5f9et45jqv3a5.D.0.Emraan-Hashmi-with-Kalki--Huma-Qureshi--Konkona-Sen-Sharma-at-the-first-look-launch-of-film-EK-THI-DAAYAN-at-Filmcity-in-Mumbaiमुंबई, एससी संवाददाता : एक डायन इस वक़्त फ़िज़ा में घूम रही है एकता और विशाल की फ़िल्म एक थी डायन को प्रमोट करने के लिए, और इस डायन को जन्म देने वाले हैं मेरठ के मशहूर सस्पेंस-थ्रिलर नॉवल राइटर वेद प्रकाश शर्मा । वेद ने इस डायन को पैदा किया है ‘एक थी डायन’ के को-प्रोड्यूसर विशाल भारद्वाज के कहने पर, जो ख़ुद भी मेरठ के हैं । मुंबई में वेद का नाम शायद ज़्यादा लोग ना जानते हों, क्योंकि उनका नाम कई साल पहले बॉलीवुड से तब जुड़ा था, जब उनके उपन्यास लल्लू पर ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ फ़िल्म बनाई गई थी, जो अक्षय कुमार की क़ामयाब फ़िल्मों में शामिल है ।

वही वेद प्रकाश शर्मा इस बार ‘एक थी डायन’ के प्रमोशन में मदद कर रहे हैं अपने लेखन करियर का पहला सुपर नेचुरल थ्रिलर उपन्यास डायन लिखकर । वेद जिस तरह के नॉवल लिखते हैं, उसे सस्ते साहित्य की श्रेणी में गिना जाता है, और संभ्रांत परिवारों में उस नॉवल को रखने तक की मनाही होती है । मुझे याद है,  नब्बे के शुरूआती दशक में जब सबसे बड़ा खिलाड़ी रिलीज़ हुई थी, तो फ़िल्म देखने के बाद मेरे मन में इस उपन्यास को पढ़ने की इच्छा पैदा हुई, और मैंने ये उपन्यास किराए पर लाकर घर में छिपते-छिपाते पढ़ा था, क्योंकि अगर मैं इस उपन्यास के साथ पकड़ लिया जाता, तो सज़ा मिलना तय था । इसीलिए किसी ए ग्रेड फ़िल्म को प्रमोट करने के लिए बी ग्रेड नॉवल का सहारा लेना वाकई चौंकाने वाला है । ये दांव-पेंच इससे पहले किसी ने नहीं आज़माया है । इसका कारण हो सकता है ‘एक थी डायन’ की कहानी, जो ऐसी औरतों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें डायन यानि काला जादू करने वाला समझा जाता है ।

ज़ाहिर है, कि फ़िल्म के दर्शकों में ऐसे लोगों की तादाद काफी होगी, जो असली ज़िंदगी में भी ऐसी कहानियों को सुनते-सुनाते आए हैं, और उनमें कुछ लोग इन बातों पर यक़ीन DSC00434भी करते होंगे । ऐसे वर्ग तक फ़िल्म को पहुंचाने में वेद प्रकाश का नाम मदद कर सकता है, क्योंकि वेद भले ही चीप लिटरेचर लिखते हैं, लेकिन उनकी पहुंच किसी बी ग्रेड फ़िल्म की तरह हिंदी बेल्ट में गहरे तक है । और वेद का उपन्यास डायन भी भूत-प्रेत वाली किसी बी और सी ग्रेड वाली हिंदी फ़िल्म की तरह ही है । नॉवल को पढ़ते वक़्त आपको हिंदी सिनेमा के घोस्ट फ़िल्ममेकर तुलसी रामसे और श्याम रामसे की याद आ जाएगी । डायन की कहानी एक ऐसी औरत पर आधारित है, जो अपने मरे हुए पति को ज़िंदा करने के लिए तांत्रिक अनुष्ठान कर रही है, जिसके लिए उसे कई बच्चों की बलि देनी है । उपन्यास चूंकि ‘एक थी डायन’ को प्रमोट करने के लिए ही लिखा गया है, लिहाज़ा इसकी कहानी को एक थी डायन की शूटिंग के साथ वीव किया गया है । यानि कहानी के मुख्य पात्रों को फ़िल्म की यूनिट से जोड़ दिया गया है । मसलन, उन्यास का हीरो अंगद इमरान हाशमी का डुप्लीकेट दिखाया गया है, जो इमरान के लिए बॉडी डबल का काम करता है, जबकि उसकी माशूका तरुणा जूनियर आर्टिस्ट है, वहीं नॉवल में जिस बच्चे की बलि दी जाती है, वो ‘एक थी डायन’ में एक क़िरदार निभा रहा है, वहीं जिस बच्ची की बलि दी जाने वाली होती है, उसे इमरान हाशमी का ज़बर्दस्त फैन दिखाया गया है ।

उपन्यास में ‘एक थी डायन’ के तीन-चार सींस की शूटिंग को भी बैकग्राउंड के तौर पर इस्तेमाल किया गया है । वहीं, एकता कपूर, विशाल भारद्वाज, डायरेक्टर कन्नन अय्यर, उनके असिस्टेंट्स, इमरान हाशमी, हुमा कुरैशी, कल्कि कोचलिन और शूटिंग लोकेशन फ़िल्मसिटी के नाम जब-तब कहानी में आते रहते हैं । एक चाइल्ड फैन के ज़रिए इमरान हाशमी का ब्रीफ़ बायो डाटा भी उपन्यास में शामिल किया गया है, ताकि दर्शकों का डायन और एक थी डायन से जुड़ाव बढ़ सके । एकता कपूर और विशाल भारद्वाज ने फ़िल्म को प्रमोट करने के लिए जो रास्ता अपनाया है, वो नया है, लेकिन एक सवाल भी खड़ा कर रहा है, कि आख़िर एक अंधविश्वास पर बनी फ़िल्म को मशहूर बनाने के लिए क्या एक ऐसा नॉवल लिखवाना ज़रूरी था, जो डायनों, चुड़ैलों, नरबलि, काली ताक़तों जैसे दकियानूसी विचारों को बढ़ावा देता हो । क्योंकि वेद प्रकाश शर्मा जैसे लेखकों के नॉवल समाज के जिस हिस्से में पढ़े जाते हैं, वो पहले से ऐसे विचारों और आस्थाओं का शिकार है ।

जैसे-तैसे लोगों के ज़हन में ये बात बिठाई जाती है, कि भूत-प्रेत, चुड़ैल-डायन सब कल्पनाओं की उपज हैं । वास्तव में ऐसा कुछ नहीं होता, लेकिन डायन जैसे नॉवल पढ़ने के बाद ये नाम असली लगने लगते हैं, क्योंकि डायन के दूसरे भाग डायन 2 के लिए उत्सुकता जगाने के लिए वेद प्रकाश शर्मा यहां तक लिखते हैं ः एक भ्रांति है, कि सुपरनेचुरल पॉवर्स जिसके पीछे पड़ जाती हैं, उसे बर्बाद कर देती हैं, मगर हिंदी के सबसे ज़्यादा बिकने वाले लेखक वेद प्रकाश शर्मा का दावा है, कि सबसे शक्तिशाली सुपर नेचुरल पॉवर माता दुर्गा हैं, जो एक बार मां की शरण में पहुंच गया, उसका कोई काली ताक़त कुछ नहीं बिगाड़ सकती । विश्वास बनाए रखने के लिए पढ़ें – डायन 2 । इस भाग में उपन्यास के नायक और काली ताक़तों के बीच लड़ाई होनी है । अब ये आपको तय करना है, कि अपनी फ़िल्म को प्रमोट करने के लिए एकता और विशाल की ये तरक़ीब  कितनी सही है और कितनी ग़लत, क्योंकि भारत वो देश है, जिसके कई हिस्सों में डायन होने का आरोप लगाकर निर्दोष औरतों को जलाकर मार डाला जाता है, किसी औरत के सिर पर सवार बुरी रूह को उतारने के लिए तांत्रिक, ओझा और अघोरी आज भी लोगों को ठग रहे हैं, और काली ताक़तों की मदद से अपना मक़सद पूरा करने के लिए आज भी बच्चों की बलि दी जाती है ।

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